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    देश की अखंडता पर सभी राजनीतिक दल एक, चीन-कश्मीर पर सरकार को मिला विपक्ष का साथ


    संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले सरकार ने डोकलाम को लेकर चीन के साथ चल रहे विवाद और अमरनाथ यात्रियों पर आतंकवादी हमले को लेकर विपक्षी दलों का विश्वास जीतने की कोशिश की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर सरकार ने तमाम विपक्षी दलों की बैठक बुलाई और उन्हें विस्तार से चीन के साथ चल रहे विवाद और अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बारे में जानकारी दी. इस दौरान विपक्षी दलों ने भी सीमा की हिफाजत में सरकार के हर कदम पर साथ देने का भरोसा दिया.
    गृह मंत्री राजनाथ सिंह के घर पर हुई इस बैठक में सरकार की तरफ से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री अरुण जेटली, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, विदेश सचिव और गृह सचिव भी शामिल हुए. वहीं विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस की तरफ से गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे और आनंद शर्मा ने बैठक में हिस्सा लिया. इस सर्वदलीय बैठक में इनके अलावा जेडीयू, लेफ्ट, एआईडीएमके, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजम समाज पार्टी समेत 14 पार्टियों के 19 नेता भी यहां मौजूद थे.
    तीन घंटे से ज्यादा चली इस बैठक में गृह सचिव ने अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले के बारे में विस्तार से प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें बताया गया कि हमला किस तरह  और किन परिस्थितियों में हुआ. हमले के बाद अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा को लेकर किए गए इंतजाम और यात्रा व्यवस्था के बारे में भी बताया गया.
    अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बारे में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने सरकार से कहा कि इस हमले की कश्मीर में हर तबके के लोगों ने घोर निंदा की है और इसके लिए अफसोस जताया है. इस तर्क के साथ उन्होंने सरकार को सलाह दी कि कश्मीर में बातचीत के दरवाजा बंद नहीं करने चाहिए. उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या का हल बंदूक के दम पर नहीं निकल सकता, इसके लिए बातचीत करना जरूरी है.
    वहीं चीन के साथ डोकलाम में चल रहे विवाद पर विदेश सचिव एस जयशंकर ने प्रेजेंटेशन दिया और वहां के हालात से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि इस जगह पर चीन की घुसपैठ भारत के लिए किस तरह खतरनाक साबित हो सकती है. उन्होंने उत्तर-पूर्व में 'चिकन नेक' कहे जाने वाले इलाके के करीब पहुंच बनाने की चीन की रणनीति और उसके दुष्परिणाओं पर भी विस्तार से चर्चा की.
    सरकार की तरफ से तीनों मंत्रियों ने विपक्षी नेताओं को चीनी घुसपैठ के खिलाफ भारतीय सेना के कदमों से अवगत कराया. वहीं बैठक में मौजूद सभी विपक्षी नेताओं ने सरकार से कहा कि भारत की सीमा सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे हर कदम में वह सरकार के साथ हैं. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, 'सभी विपक्षी दलों ने सरकार को भरोसा दिलाया कि देश की अखंडता के सवाल पर हम सभी साथ हैं.'
    हालांकि कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने सरकार को यह नसीहत भी दी कि चीन के साथ सीमा पर तनाव घटाने के लिए कूटनीतिक तरीकों के इस्तेमाल पर जोर देना चाहिए. कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे पहले है. हमने सरकार को कूटनीतिक तरीके के जरिये हालात से निपटने की सलाह दी है.
    दरअसल संसद सत्र शुरू होने से पहले इस बैठक को बुलाने का सरकार का मकसद यह था कि विपक्षी पार्टियों को अमरनाथ और खास तौर पर चीन के मुद्दे पर विश्वास में लिया जाए, ताकि संसद में वह इन बेहद संवेदनशील मामलों पर सरकार को नहीं घेरें.

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