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    रीजनल सिनेमा को ग्लोबल प्लैटफॉर्म पर ले जाना चाहती हूं : प्रियंका चोपड़ा

    प्रियंका चोपड़ा अब केवल बॉलिवुड तक ही सीमित नहीं हैं। हिंदी फिल्म इडस्ट्री में कई सफल फिल्में देने के बाद वह हॉलिवुड में भी अपनी ऐक्टिंग का लोहा मनवा चुकी हैं। ऐक्टिंग के बाद अब प्रियंका फिल्म प्रॉडक्शन में भी हाथ आजमा रही हैं। प्रियंका के प्रॉडक्शन हाउस पर्पल पेबल पिक्चर्स की पहली फिल्म 'काय रे रासकला' रिलीज़ के लिए तैयार है। यह एक मराठी फिल्म है। हाल में प्रियंका भारत लौटी हैं, वह अमेरिका में अपनी हॉलिवुड फिल्म 'अ किड लाइक जेक' की शूटिंग कर रही थीं।

    शुक्रवार को नवभारत टाइम्स डॉट कॉम से बात करते हुए प्रियंका ने कहा, 'यह क्षण मेरे लिए बहुत खास है। हमारी फिल्म रिलीज़ होने के लिए तैयार है। हमने अपना प्रॉडक्शन हाउस नए कलाकारों को मौका देने के लिए बनाया है। मेरे लिए यह बहुत जरूरी है कि प्रतिभाशाली ऐक्टर्स को मौका दिया जाए।' प्रियंका ने अपनी फिल्म निर्माण योजनाओं के बारे में बताया, 'हमारे देश में काफी प्रतिभाशाली ऐक्टर्स हैं। मैं रीजनल सिनेमा को भी ग्लोबल प्लैटफॉर्म पर ले जाना चाहती हूं। जब मैं 'मैरी कॉम' की शूटिंग के लिए असम गई थी तब मैंने देखा कि भारत के उस हिस्से को हम अभी तक इग्नोर करते रहे हैं। इसलिए हम बंगाली, पंजाबी, भोजपुरी जैसी कई भाषाओं में फिल्में बना रहे हैं। हमारी हिंदी और इंग्लिश फिल्में बनाने की भी योजना है।'

    हालांकि जब पूरा बॉलिवुड IIFA अवॉर्ड में शिरकत कर रहा है तब प्रियंका से IIFA अवॉर्ड में शामिल नहीं होने के बारे में पूछ जाने पर वह बिफर गईं। प्रियंका ने आइफा अवॉर्ड में नहीं जाने के बारे में कहा, 'मैं हमेशा उल्टा ही करती हूं, मेरा जन्मदिन है और मैं अपने परिवार के साथ वक्त बिताना चाहती हूं। मैंने पिछले काफी समय से अपने परिवार के साथ वक्त नहीं बिताया है। वैसे भी हर ऐक्टर साल में सारे अवॉर्ड फंक्शन में शिरकत नहीं करता है। मेरे अलावा भी कई ऐक्टर्स ऐसे होंगे जो इस अवॉर्ड फंक्शन में नहीं गए हैं।'
    वहीं जब प्रियंका से ऑस्कर अवॉर्ड से जुड़ने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'ऑस्कर वालों ने मुझे बुलाया और मैंने हां कह दिया। मैं अकैडमी की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने दुनिया भर की अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को शामिल किया है। जब हम अकैडमी के सदस्य होते हैं तो हमारी राय भी पूछी जाती है। मैं अपने व्यूज़ और ऑपिनियन पर बहुत स्पष्ट हूं। अकैडमी में विदेशी फिल्में भी आती हैं लेकिन वह सिर्फ एक कैटिगरी में शामिल होती हैं। ऐसा शायद इसलिए है कि भारतीय फिल्मों के साथ-साथ वहां पूरी दुनिया से काफी सारी फिल्में पहुंचती हैं। मैं भी वहां अपने व्यूज़ के जरिए अपनी बात वहां रख सकती हूं।'

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