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    Film Review: 'बहन होगी तेरी' मोहल्ले वाले प्यार की कहानी है

    फिल्म का नाम: बहन होगी तेरी
    डायरेक्टर: अजय पन्नालाल
    स्टार कास्ट: राजकुमार राव, श्रुति हसन, दर्शन जरीवाला, गौतम गुलाटी, हेरी टेंगरी, गुलशन ग्रोवर
    अवधि: 2 घंटा 08 मिनट
    सर्टिफिकेट: U/A
    रेटिंग: 3 स्टार
    अजय पन्नालाल की यह डिरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म है जिसमें उन्होंने नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्टर राजकुमार राव और अलग तरह की कास्टिंग के साथ एक मोहल्ले की कहानी दर्शाने की कोशिश की है, आखिर कैसी बनी है यह फिल्म आइए फिल्म की समीक्षा करते हैं.
    कहानी
    यह कहानी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक मोहल्ले की है जहां बचपन के दोस्त गट्टू नौटियाल (राजकुमार राव) और बिन्नी अरोड़ा(श्रुति हसन) का परिवार आमने सामने रहता है. श्रुति जहां एक तरफ पढ़ाई करती है वहीं गट्टू अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलता है और समय-समय पर नाटक में शिवजी का रोल भी निभाता है. गट्टू को बिन्नी से बहुत प्यार है लेकिन वो जब तक बिन्नी से बता पता, काफी लेट हो चुका था और गट्टू के पापा(दर्शन जरीवाला) तो उन दोनों को भाई बहन ही मनाते हैं. कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब बिन्नी का भाई, उसकी सगाई राहुल (गौतम गुलाटी) से कर देता है, जिसकी वजह से गट्टू बहुत परेशान होता है और पूरा वाक्य अपने दोस्त भूरा (हरि तंगी) से डिस्कस करता है. फिर अलग-अलग किरदारों की एंट्री होती है और आखिरकार फिल्म को अंजाम मिलता है. क्या गट्टू को बिन्नी मिल पाती है, या वो उसकी बहन ही रह जाती है, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.
    जानिए आखिर फिल्म को क्यों देख सकते हैं
    फिल्म की शूटिंग रीयल लोकेशंस पर हुई है और छोटे शहर के प्यार से कई लोग कनेक्ट कर पाएंगे. फिल्म की खासियत होती है की उसके मोमेंट्स आपको अंत तक याद रह जाएं, और कुछ ऐसा ही इस फिल्म में भी है, क्रिकेट मैच, नाटक में शिवजी की एंट्री, वन लाइनर्स, जैसे कई पल याद रह जाते हैं.
    फिल्म में राजकुमार ने बहुत ही उम्दा अभिनय किया है और उनके किरदार से कनेक्ट भी किया जा सकता है, वहीं उनके दोस्त के रूप में हरि टेंगरी ने बढ़िया काम किया है, गुलशन ग्रोवर का अच्छा किरदार है, श्रुति हासन ने ठीक-ठाक अभिनय किया है. गौतम गुलाटी का भी सहज अभिनय है. दर्शन जरीवाला आपको बहुत हंसाते हैं और बाकी किरदारों की कास्टिंग भी करेक्ट है.
    फिल्म की खासियत ये भी है की इसमें प्रेशर के साथ जबरदस्ती वाले सीन नहीं है, लेकिन आम जिंदगी से रेलेटेड फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट, दूधवाले की कहानी, और कॉमेडी के पंच बहुत अच्छे हैं
    कमजोर कड़ियां
    फिल्म का संगीत रिलीज से पहले हिट नहीं हो पाया, उसके ऊपर काम किया जाता, तो फिल्म और भी दिलचस्प लगती, साथ ही क्लाइमेक्स और बेहतर हो सकता था. स्क्रीनप्ले को और भी ज्यादा क्रिस्प और दिलचस्प बनाया जा सकता था.
    बॉक्स ऑफिस
    फिल्म का बजट काफी कम है और टाइट बजट में इसे ज्यादा से ज्यादा स्क्रीन्स में रिलीज किया जाने वाला है. फिल्म की टक्कर 'राब्ता' से होने जा रही है जिसकी वजह से लोगों का झुकाव ज्यादातर वीकेंड पर 'राब्ता' की तरफ रह सकता है लेकिन वीकेंड के बाद वर्ड ऑफ माउथ इस फिल्म को आगे लेकर जा सकता है. फिल्म की ओपनिंग अच्छी लगने की उम्मीद बताई जा रही है.

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