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    पहले हुआ दुष्कर्म फिर सामाजिक बहिष्कार और अब शव ढोने पर मजबूर

    छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में मानवता एक बार फिर शर्मशार हो गई. समाज के जिन ठेकेदारों ने दुष्कर्म पीड़िता का जीते हुए ही अंतिम संस्कार कर दिया था, गुरुवार को उसी परिवार की बुजुर्ग महिला की मौत पर कंधा देने के लिए भी कोई नहीं मिला.

    खुद दुष्कर्म पीड़िता, पिता और छोटे भाई के साथ शव लेकर श्‍मशान पहुंची और अंतिम संस्कार किया.

    देवभोग के डोहेल गांव में बुधवार की रात बुजुर्ग महिला की मौत हो गई. उसका भरा-पूरा परिवार, समाज और रिश्तेदार होने के बाद भी गुरुवार को उसकी अंतिम यात्रा में कोई शामिल नहीं हुआ. कारण सिर्फ इतना था कि उसके दामाद और लड़की की बेटी उसे कंधा देने पहुंच गए थे.

    देवभोग के जगन्नाथपारा में रहने वाले दामाद का कसूर सिर्फ इतना है कि उसने दुष्कर्म के बाद मां बनी नाबालिग बेटी को अपने घर में रखा हुआ है. समाज को ये नागवार गुजरा और उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया.
    उसके बाद से वह अपनी बेटी को लेकर अपनी सास को कंधा देने पहुंच गया. इसकी वजह से परिवार, समाज और रिश्तेदारों ने अंतिम यात्रा में शामिल होने के मना कर दिया.

    2015 में उसकी नाबालिग लड़की के साथ पड़ोस के एक युवक ने दुष्कर्म किया था. वह गर्भवती हो गई. पीड़िता की शिकायत पर न्यायालय ने आरोपी को जेल भेज दिया. मगर समाज के लोगों ने पीड़ित परिवार को लड़की को साथ में नहीं रखने की बात कहकर समाज से बहिष्कृत कर दिया.

    समाज के तानों से तंग आकर पीड़ि‍त परिवार फिलहाल गांव के बाहर श्मशान घाट के पार सुनसान इलाके में रहता है.

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