कभी साइकिल से चलते थे बाबा रामदेव, आज हैं अरबों के मालिक - jabalpur awaaz

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Wednesday, 3 May 2017

कभी साइकिल से चलते थे बाबा रामदेव, आज हैं अरबों के मालिक

लखनऊ। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा रामदेव के आयुर्वेदिक रिसर्च सेंटर का उद्घाटन किया। कभी साइिकल से चलने वाले बाबा रामदेव आज अरबों की संपत्ति के मालिक हैं। उनकी कंपनी पतंजलि के प्रोडक्ट पूरे देश में आपको कहीं भी मिल जाएंगे। पतंजलि बड़ा ब्रांड बनकर उभरा है।
बाबा रामदेव को सब उनके आसनों और उनके 'पतंजलि' के लिए तो जानते हैं लेकिन कम ही लोग ये जानते होंगे कि पढ़ाई में अच्‍छा होने के बावजूद उन्‍होंने स्‍कूल छोड़ दिया था। बचपन में रामदेव दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं से इतना प्रभावित हुए थे कि उन्होंने सरकारी स्कूल को अलविदा कह दिया, घर से भाग गए और गुरुकुल में दाखिला ले लिया।
1875 में लिखी दयानंद सरस्वती की किताब ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का रामदेव पर गहरा असर पड़ा था। सरस्वती के इसी प्रभाव के कारण रामदेव कभी फोन पर हैलो नहीं कहते। इसके बजाय वह ओम का जाप करते हैं। सत्यार्थ प्रकाश के पहले अध्याय में ओम की व्युत्पत्ति और महत्व पर प्रकाश डाला गया है। इस किताब को पढ़ने के बाद रामदेव प्राचीन ऋषियों के नक्शेकदम पर चलने की कोशिश करने लगे।

अक्सर साइकिल से चलते थे बाबा रामदेव

आज से लगभग 22 साल पहले स्वामी रामदेव ने संन्यास धारण किया था। रामदेव एक ऐसा नाम जिसको शायद आज से 15-20 साल पहले तक कोई जनता नहीं था। हरियाणा में जन्मे रामदेव कब हरिद्वार आए इसको लेकर भी कई सवाल हैं। रामदेव के बारे में हरिद्वार के कनखल से लेकर हर जगह एक चर्चा जरूर रही कि उनको अक्सर साइकिल पर देखा जाता था, दुबले पतले से इंसान के तन पर सफेद कपड़ा होता था और पैरों में खड़ाऊं।
हरिद्वार में रहने वाले तब के रामदेव यहां तक के सफ़र में अकेले नहीं थे बल्कि उनका साथ और उनसे कई ज्यादा गुरु के प्रिय कर्मवीर हुआ करते थे। गुरुकुल और हरियाणा से अपनी शिक्षा ग्रहण करने वाले रामदेव की रुचि योग में आज से करीब 20 साल पहले ही जाग चुकी थी लेकिन तब वो ये नहीं जानते थे की आज जिस कोठरी में वो रहते हैं, आने वाले समय में उतनी छोटी कोठरी में तो उनकी गाड़ियां भी खड़ी नहीं हो पाएंगी।

पहले योग की छोटी-छोटी क्लासेस देते थे रामदेव

धीरे-धीरे समय बदला, साल निकले और रामदेव अचानक से भारत में योग की छोटी-छोटी क्लासेस देने लगे। बाबा के कई जगह छोटे-छोटे कैंप लगते थे जिनमें आने वाले लोगों की संख्या मात्र 30 से 40 हुआ करती थी, लेकिन योग से लोगों को फर्क पड़ने लगा तो बाबा ने इसकी फ़ीस रख डाली। लोग बताते हैं कि बाबा उस वक्त फ़ीस के एवज में 30 से 50 रुपया लिया करते थे।

पतंजलि की ब्रांड वैल्यू अरबों में

जो रामदेव तब साइकिल पर चलते थे आज वो हेलीकॉप्टर से यात्रा करते हैं। होंडा सिटी कार तो जाने दीजिये, आज बाबा के पास कई बुलेटप्रूफ गाड़ियां मौजूद हैं। आज रामदेव अरबों के मालिक बन गए हैं। देखा जाए तो आज रामदेव के हर बड़े शहर में बड़े ठिकाने तो हैं ही साथ ही विदेशों में कई बड़े भवन भी हैं। साल 2007 में जब पतंजलि आयुर्वेद की शुरुआत हुई तो किसी ने नहीं सोचा था कि 10 साल में ही ये कंपनी कई उत्पाद श्रेणियों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को चुनौती पेश करने लगेगी। लेकिन हुआ यही. योग गुरु बाबा रामदेव बैनरों से लेकर टीवी तक कंपनी के उत्पादों का प्रचार कर रहे हैं और उनकी कंपनी अब कई हज़ार करोड़ का साम्राज्य बन चुकी है।
2015-16 में पतंजलि आयुर्वेद की कमाई 5 हजार करोड़ पर पहुंच गई थी जो उससे पिछले साल की तुलना में 150 फीसदी ज्यादा है। कंपनी 10 हजार करोड़ कमाई तक पहुंचने का लक्ष्य बना रही है। पांच साल में कंपनी की कमाई में दस गुना से ज़्यादा का उछाल आया है। कामयाबी की इस स्पीड के पीछे पतंजलि आयुर्वेद का विस्तार है। कंपनी देश के कई राज्यों में नए प्लांट और फ़ूड पार्क बना रही है। पतंजलि आयुर्वेद को असम के तेजपुर में हर्बल और मेगा फूड पार्क के लिए 150 एकड़ जमीन दी जा चुकी है। लेकिन इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक बाबा रामदेव ने असम के उद्योग मंत्री चंद्र मोहन पटवारी से मुलाकात कर 33 एकड़ ज़मीन और मांगी। 1,200 करोड़ रुपए के इस पार्क में 10 लाख टन सालाना क्षमता की मैन्युफ़ैक्चरिंग इकाई होगी।

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