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    दिमाग से निकालनी होगी लाल बत्ती : मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि ‘नये भारत’ में वीआईपी संस्कृति के तहत कुछ खास लोगों को तवज्जो देने के स्थान पर अब देश का हर नागरिक खास है। मोदी ने आज यहां आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात ‘ कार्यक्रम के जरिये देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि लाल बत्ती वीआईपी संस्कृति का प्रतीक बन गया था । इसे लेकर लोगों के मन में नफरत का माहौल था । अब यह लाल बत्ती तो चली गयी है लेकिन लोगों के दिमाग मे अति विशिष्ट होने का जो अहसास घुस गया है ,वह भी पूरी तरह समाप्त होना चाहिए।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में आज कहा कि रामानुजाचार्य ने सामाजिक एकता के लिए बड़ी लड़ाई लड़ी थी और अछूत समझे जाने वाले लोगों को मंदिर में प्रवेश दिलाने के लिए आंदोलन किये थे। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी एक हजारवीं जयंती पर कल एक डाक टिकट जारी करेगी।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि एक मई को श्रमिक दिवस के रूप में भी मनाया जा रहा है और इस मौके पर बाबा साहब अम्बेडकर की याद आना स्वाभाविक है, जिन्होंने श्रमिकों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किये थे। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर कर्नाटक के महान संत बसवेश्वर की भी याद आती है, जिन्होंने बारहवीं शताब्दी में कन्नड भाषा में श्रम और श्रमिक पर गहन विचार रखे। उन्होंने कहा था कि ‘काय कवे कैलाश’ यानी अपने परिश्रम से भगवान की प्राप्ति की जा सकती है। दूसरे शब्दों में श्रम ही शिव है।

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