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    तीन-तीन दिन बाद मिलती है यहां पानी की बूंद

    मध्य प्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट भी गहराया है. राज्य में पानी की कमी के चलते लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है. राज्य के 101 निकायों में एक दिन के बाद पानी आ रहा है तो 38 निकायों में दो दिन तक इन्तजार करना पड़ रहा है.
    बूंद-बूंद को तरसे लोग
    राज्य सरकार एक ओर जहां 221 निकायों में रोजाना पानी की सप्लाई का दावा कर रही है तो दूसरा सच यह भी है कि राज्य के 18 निकाय ऐसे हैं, जहां लोगों को पानी की बूंद हासिल करने के लिए तीन-तीन दिन का लम्बा इन्तजार करना पड़ता है.
    इन शहरों में है भारी दिक्कत
    संभाग---दो दिन छोड़कर---तीन दिन छोड़कर
    सागर---6 ---3
    भोपाल---5---1
    जबलपुर---5---4
    ग्वालियर---4---1
    इंदौर---8---3
    उज्जैन---10---3
    करोड़ों खर्च पर नतीजा सिफर
    राज्य सरकार प्रदेश में पानी की घोर किल्लत को देखते हुए व्यवस्था सुधारे जाने की बात कर रही है. मध्य प्रदेश सरकार के एक मंत्री के मुताबिक। सरकार  ग्रामीण पेयजल के तहत 900 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है. सरकार आगामी एक साल के अंदर पांच हजार ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजना को लागू करेगी.
    कलेक्टर की मांग पर राहत राशि दी गई
    राज्य में गहराते हुए जल संकट से उबरने के लिए कलेक्टरों की मांग पर राहत राशि जारी की गयी है. इसके तहत ट्रांसपोर्ट (टैंकर) के जरिए पेयजल मुहैया कराने के निर्देश जारी हुए है. लेकिन सवाल यह उठता है कि हर साल करोड़ों खर्च करने के बाद भी आखिर क्यों गर्मी के मौके पर सरकार को नई योजनाएं अमल में लाने और लागू करने की याद आती है?

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